रविवार, अगस्त 09, 2009

कलेक्टर व एसपी द्वारा मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र का भ्रमण

कलेक्टर व एसपी द्वारा मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र का भ्रमण

भिण्ड 8 अगस्त 2009

       कलेक्टर श्री के.सी.जैन तथा पुलिस अधीक्षक डा राजेन्द्र प्रसाद ने आज औद्योगिक केन्द्र मालनपुर का निरीक्षण किया तथा विकास भवन में मालनपुर स्थित विभिन्न औद्योगिक इकाईयों के प्रतिनिधियों से भेंट की। उन्होंने केडवरी इण्डिया लिमिटेड में आयोजित मौकपूल का पूर्व अभ्यास भी देखा इस अवसर पर एसडीएम गोहद श्री मनोज माथुर महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र मालनपुर श्री ए.के.सारस्वत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

कनेरा उदवहन सिंचाई योजना का कार्य प्रारंभ कराने के प्रयास , पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जावेगी,, कलेक्टर व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

कनेरा उदवहन सिंचाई योजना का कार्य प्रारंभ कराने के प्रयास , पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जावेगी,, कलेक्टर व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण

भिण्ड 8 अगस्त 2009

       जिले की महत्वाकांक्षी योजना कनेरा उदवहन सिंचाई योजना के बंद पडे कार्य को शीघ्र प्रारंभ कराने के उध्देश्य से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह की पहल पर कलेक्टर श्री के.सी. जैन और पुलिस अधीक्षक डा राजेन्द्र प्रसाद ने विभागीय अधिकारियों के साथ चम्बल नदी के किनारे प्रोजेक्ट स्थल का मुआयना किया तथा प्रोजेक्टर की। निर्माण ऐजेन्सी राजकमल विल्डर्स अहमदाबाद के प्रतिनिधियों व ग्रामीणों से चर्चा की प्रोजेक्ट में कार्यरत अमले को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया उपलब्ध कराने  का आश्वासन दिया ।

       कलेक्टर श्री जैन ने कहा कि कनेरा उदवहन सिंचाई  योजना जिले की अतिमहत्वाकांक्षी योजना  है इसके पूर्ण हो जाने से जिले की 15 हजार 500 हेक्टेयर  भूमि को सिंचाई सुविधा प्राप्त  हो सकेगी ।

       श्री जैन ने कहा कि  योजना को प्रत्येक परिस्थिति में प्रारंभ कर पूर्ण कराने के लिये मध्यप्रदेश शासन और प्रशासन कृत संकल्पित है । उन्होंने कहा कि गत दिनों हुई दुर्घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिये सभी एतिहाती कदम जिला प्रशासन ध्दारा उठाये जा रहे है। उन्होंने कनेरा उदवहन योजना के प्रोजेक्ट रिपोर्ट के आधार पर स्थल मुआयना किया तथा ऐसे किसान जिनकी जमीन प्रोजेक्ट के लिये अधिग्रहित की गई उन्हे मुआवजा के शेष केस विशेष अभियान चलाकर निपटारा कराने के निर्देश जल संसाधन व राजस्व विभाग के अधिकारियों को दिये।

       पुलिस अधीक्षक डा प्रसाद ने कहा कि कनेरा उदवहन सिंचाई योजना को शीघ्र प्रारंभ कराने के प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि योजना के कान्ट्रेक्टर कम्पनी के प्रतिनिधियों को पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जावेगी प्रोजेक्ट स्थल पर अपहरण की घटना के बाद से अस्थाई पुलिस चौकी स्थापित कर दी गई है प्रोजेक्ट का कार्य प्रारंभ हो जाने पर निर्माण एजेन्सी की मांग व आवश्यकतानुसार सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जावेगी।

       प्रभारी कार्यपालन यंत्री श्री सुनील कुमार सवरवाल  ने प्रोजेक्ट के सम्बन्ध में बताया कि कनेरा उदवहन  सिंचाई योजना भिण्ड जिले की अटेर तहसील में ग्राम कनेरा के निकट चम्बल नदी पर प्रस्तावित है। इस योजना ध्दारा चम्बल नदी से 200 क्यूसेक पानी उदवहन कर भिण्ड जिले के 96 ग्रामों में 15 हजार 500 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जा सकेगी।

       इस योजना की मूल प्रशासकीय स्वीकृति रूपये 397.59 लाख की म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग द्वारा दिनांक 16.1.1980 को प्रदान की गई थी एवं योजना पर वर्ष 1981 से 1995 के मध्य कार्य किया गया लेकिन पर्याप्त आंवटन उपलब्ध न होने के कारण योजना का कार्य बंद हो गया था। पुन: वर्ष 2006 में योजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया एवं म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग द्वारा रूपये 4695.39 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 7 अगस्त 07 को प्रदान की गई।

       योजना के सिविल कार्य के लिये (इन्टेक वैल, इन्टेक चैनल, जैक वैल, एप्रोच ब्रिज, राइजिंग, डिलीवरी मेन एंव डिस्ट्रीव्यूशन चैम्बर का निर्माण) निविदा आमंत्रित कर मै राजकमल बिल्डर्स प्रा लि अहमदाबाद को कार्य आवंटित किया गया है एवं योजना का कार्य प्रगति पर है।    

       इस योजनान्तर्गत पानी चम्बल नदी से इन्टेक वैल में डालकर इन्टेक चैनल के माध्यम से जैक वैल में लाया जाकर 1150 अश्वशक्ति के पॉच पम्पों द्वारा उपलब्ध कर 1.60 मीटर व्यास की 2.10 किमी लम्बी दो पाईप लाईनों के माध्यम से डिस्ट्रीव्यूरशन चैम्बर में डाला जायेगा। डिस्ट्रीव्यूशन चैम्बर से 1.16 किमी लम्बी पोषक नहर द्वारा पानी अम्बाह शाखा नहर में प्रदाय किया जाकर भिण्ड जिले के 95 ग्रामों में 15500 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हेतु उपलब्ध हो सकेगा। .

 

ग्वालियर शिक्षा का संभावनाशील 'हब' - राकेश अचल

ग्वालियर शिक्षा का संभावनाशील 'हब'

  • राकेश अचल
  • लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

 

धरती उर्वरा हो, तभी उसमें फसल अच्छी होती है। ठीक यही बात शिक्षा और ग्वालियर पर लागू होती है। ग्वालियर उत्तरी म प्र. में ही नहीं बल्कि उत्तर भारत मे भी एक महत्वपूर्ण 'एज्यूकेशन हब' के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

       ग्वालियर स्वतंत्रता पूर्व से ही शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। ग्वालियर के तत्कालीन शासकों ने शिक्षा के महत्व को बहुत पहले समझ और पहचान लिया था। ग्वालियर दरबार ने भी शिक्षा को रियासत की जिम्मेदारी के रूप में लिया और 1846 में 'लश्कर मदरसा' के नाम से लश्कर में पहला आधुनिक शिक्षा विद्यालय खोला। रियासत के एक मंत्री श्री दिनकर राव राजवाड़े की व्यक्तिगत रूचि के कारण 1852 से 1859 के बीच ग्वालियर में अंग्रेजी शिक्षा भी प्रारंभ कर दी गई। ग्वालियर अकेली ऐसी रियासत थी जहां 1857 में दो हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में स्कूल खोल दिये गये थे।

       ग्वालियर में 1885 में हाईस्कूल तथा 1890 में इन्टरमीडिएट कालेज की स्थापना कर दी गई थी। 1887 में ही ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया की रजत जयंती स्मारक के रूप में बनी इमारत में विक्टोरिया कालेज की स्थापना की गई। इस इमारत का लोकार्पण 1899 लार्ड कर्जन ने किया। इसी इमारत में आज महारानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय संचालित हो रहा हे।

       ग्वालियर में 1895 में सरदार स्कूल और मिलिट्री स्कूल की स्थापना भी की गई। 1903 में यहां दो नये कालेज और 1905 में पहला कन्या महाविद्यालय खोला गया। 1915 में पहली आयुर्वेद शाला और 1939 में कमलाराजा कन्या महाविद्यालय स्थापित किया गया। इस संस्थान में आज विभिन्न संकायों की 7500 छात्रायें अध्ययन करतीं हैं।

       आजादी से पूर्व ही 1946 में ग्वालियर में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय की स्थापना की गई। 1949 में आयुर्वेद महाविद्यालय और 1950 में कृषि महाविद्यालय स्थापित कर दिया गया। 1957 में महारानी लक्ष्मीबाई के नाम पर राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय स्थापित किया गया, जो अब स्वयं डीम्ड यूनीवर्सिटी बन चुका है।

       ग्वालियर में 1964 में जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद 1984 तक शिक्षा के क्षेत्र में एक ठहराव सा आ गया। लेकिन 1985 के बाद ग्वालियर के तत्कालीन सांसद माधवराव सिंधिया ने इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल की। सिंधिया के प्रयासों से ग्वालियर को राष्ट्रीय यात्रा, पर्यटन प्रबंधन संस्थान मिला। उन्हीं के प्रयासों से ग्वालियर में अटलबिहारी बाजपेयी सूचना प्रबंधन तकनीकी का राष्ट्रीय संस्थान मिला। खान-पान प्रबंधन की राष्ट्रीय संस्था भी ग्वालियर आ गई।

       ग्वालियर में 59 साल बाद सरकार के प्रयासों से संगीत और कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना भी हो गई है। सरकार ने ग्वालियर में चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना का संकल्प भी व्यक्त किया है। हाल ही में कृषि मंत्री ने यहां पशु चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की भी घोषणा की है।

       ग्वालियर की भौगौलिक स्थिति के साथ ही यहां उपलब्ध बेहतर आवागमन और आवास सुविधाओं को देखते हुए निजीक्षेत्र के अधिकांश शैक्षणिक संस्थान और कोचिंग संस्थान ग्वालियर पहुँच चुके हैं। ग्वालियर में अब कला विज्ञान, चिकित्सा, तकनीक, पर्यटन शारीरिक शिक्षा, प्रबंधन, फैशन, एन सी सी. ही नहीं बल्कि नागरिक उड्डयन की शिक्षा देने वाले राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों की सुदृढ़  उपलब्ध है।

आई आई आई टी एम. सूचना तकनीक के क्षेत्र में आई क्रांति को देखते हुए ग्वालियर में भारत सरकार ने इंडियन इंस्टीटयूट आफ इन्फारमेशन टैक्नोलाजी एण्ड मैनेजमेण्ट की स्थापना ग्वालियर में की। 60 हैक्टेयर के विशाल क्षेत्रफल में फैले इस राष्ट्रीय संस्थान में सूचना तकनीक और प्रशिक्षण के साथ ही बहुउद्देश्यी कार्यशालाओं, शोध परामर्श तथा कामकाजी लोगों के लिये सतत शिक्षण का काम पिछले एक दशक से हो रहा है।

       पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से जोड़ा जा चुका यह संस्थान पोस्ट ग्रेज्युएट, मैनेजेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम चला रहा है। इस संस्थान ने सूचना तकनीक एवं प्रबंधन के क्षेत्र में अपना अग्रणी स्थान बना लिया है। 

आई आई टी टी एम. पर्यटन एवं यात्रा पबंधन विषय पर देश में प्रशिक्षण की सुविधा गिनेचुने शहरों में उपलब्ध है। ग्वालियर में भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थान 1983 से इस विषय से जुड़े छात्रों को स्नातक तथा स्नातकोत्तर डिग्री एव डिप्लोमा प्रदान कर रहा है। इस संस्थान में देश के नामचीन विशेषज्ञ तो हैं ही, साथ ही यहां हॉस्टल की भी बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है। यह संस्थान जीवाजी विश्वविद्यालय परिसर में स्वयं की इमारत में संचालित है।

      एम आई टी एस. ग्वालियर में तकनीकी शिक्षा का शुभारंभ आजादी के पहले ही उपलब्ध हो गया था। ग्वालियर के तत्कालीन शासक जीवाजी राव सिंधिया ने 1957 में माधव इंस्टीटयूट ऑफ टैक्नोलॉजी एवं साइंसेज की स्थापना की थी। यहां बी ई. से लेकर पी एच डी. तक के अध्ययन-अध्यापक का प्रबंध है यहां सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक्स, कम्प्यूटर के अलावा कृषि इंजिनियरिंग की पढ़ाई की व्यवस्था है। संस्थान में फार्मा, पोलीटेक्नोलॉजी साइंस, वायो कैमिस्ट्री आदि विषयों के अध्ययन अध्यापन के इंतजाम किये जा रहे हैं।

जीवाजी विश्वविद्यालय- ग्वालियर के एज्युकेशन हब बनने में जीवाजी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका है। जीवाजी विश्वविद्यालय की स्थापना 1966 में की गई। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने इस संस्थान का लोकार्पण किया था। यह विश्वविद्यालय लगभग प्रत्येक विषय के अध्ययन की उच्चस्तरीय व्यवस्था कर रहा है।

जीवाजी विश्वविद्यालय की अध्ययन  शालाओं में विज्ञान, अर्थशास्त्र, गणित, राजनीति  शास्त्र, के अतिरिक्त प्रबंधन, इंजिनियरिंग, पर्यटन के प्रथक संस्थान हैं। यह देश का अकेला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां प्रचलित विषयों के अलावा संगीत, ज्योतिष, योग, प्राकृतिक चिकित्सा जैसे पारंपरिक विषयों पर भी अध्ययन एवं शोध कराया जाता है।

संगीत शिक्षा - ग्वालियर सूचना प्रौद्यौगिकी का ही नहीं, संगीत शिक्षा का भी प्रचीन केन्द्र है। यहां पांच सौ साल पहले राजा मानसिंह तोमर ने पहली संगीत शाला स्थापित की थी। आज यहां माधव संगीत विद्यालय, चतुर संगीत महाविद्यालय, भारतीय संगीत महाविद्यालय के साथ ही  अब पूरा का पूरा संगीत विश्वविद्यालय स्थापित कर दिया गया है। संगीत को कैरियर बनाने के इच्छुक छात्र यहां विश्वविद्यालय में रह कर संगीत पर शोध के साथ ही गुरू शिष्य परंपरा के अन्तर्गत भी ज्ञानवर्धन कर सकते हैं। शीघ्र ही यहां एक ख्याल केन्द्र भी बन रहा है।

कृषि शिक्षा- कृषि प्रधान भारत देश में कृषि विज्ञान की शिक्षा के माध्यम से भी रोजगार की अनेक संभावनायें बनी हैं। ग्वालियर में अब तक कृषि विज्ञान में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर की शिक्षा ही उपलब्ध थी, किंतु इसी साल से यहां राजमाता विजयाराजे कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ पी एच डी. की उपाधि हासिल की जा सकती है। मृदा परीक्षण, मृदा उपचार, उन्नत बीजों तथा कृषि उत्पादनों पर शोध और विकास के क्षेत्र में ग्वालियर जैसी व्यवस्थायें दूसरे क्षेत्रों में कम ही हैं।

शारीरिक शिक्षा - ग्वालियर शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण और अनुसंधान का देश का ही नहीं अपितु एशिया का सबसे बड़ा केन्द्र है। यहां 1957 में तत्कालीन शासकों द्वारा 150 हैक्टेयर क्षेत्रफल में स्थापित लक्ष्मीबाई राष्ट्रीय शारीरिक शिक्षा महाविद्यालय अब विश्वविद्यालय बन चुका है। इस संस्थान में सभी प्रमुख खेलों के प्रशिक्षण, शोध , खेल चिकित्सा, खेल पत्रकारिता, योगा सहित सभी प्रमुख विषयों के अध्ययन, अध्यापन की विस्वस्तरीय व्यवस्थायें हैं। इस संस्थान का बहुत तेजी से विकास हो रहा है। यहां स्नातक शिक्षा से लेकर पी एच डी. तक के अध्ययन का प्रबंध है।

चिकित्सा शिक्षा- ग्वालियर में उत्तर भारत का सबसे पुराना मेडीकल कालेज है, गजराराजा मेडीकल कालेज की स्थापना ग्वालियर में 1946 में की गई थी। इस चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़ा एक विशाल अस्पताल भी है यहां एम बी बी एस., एम एस., एम डी., के अध्ययन, अध्यापन की व्यवस्था सतत् चली आ रही है। राज्य सरकार यहां शीघ्र ही एक हजार विस्तर का अस्पताल और बनाने जा रहीं है।

       एलोपैथी के अलावा यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय भी पांच दशकों से संचालित है। इसी महाविद्यालय से जुड़ी आयुर्वेदिक फार्मेसी भी है।

कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान- ग्वालियर में 35 साल पहले स्थापित किया गया कैंसर चिकित्सालय एवं शोध संस्थान अब रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित हो चुका है। यहां माइक्रोबायोलॉजी में स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ ही नर्सिंग का एक विशाल कालेज है। निजी क्षेत्र में दंतचिकित्सा के अतिरिक्त नर्सिंग प्रशिक्षण के अनेक संस्थान ग्वालियर में हैं जो देश-दुनियां को प्रतिवर्ष सैकड़ों नर्स तैयार कर दे रहे हैं।

महिला शिक्षा- म प्र. में महिला शिक्षा के क्षेत्र में ग्वालियर स्वतंत्रा प्राप्ति से पहले से अग्रणीय रहा है। यहां प्रदेश का सबसे बड़ा कमलाराजा कन्या विद्यालय है। इस महाविद्यालय में अलग- अलग संकाय की 7500 सीटें हैं। ग्वालियर में महिला पोलिटेक्नीक, महिला आई टी आई. , महिला बी टी आई. और महिला शिक्षा संस्थान है। एशिया का सबसे बड़ा एन सी सी. महिला प्रशिक्षण संस्थान ग्वालियर को पहचान बन चुका है। यहां पूरे वर्ष ओरियेंटेशन कार्यक्रम चलते रहते हैं।

       अब अभिभावक अपने बच्चों का कोचिंग और अध्ययन के लिये कोटा, जयपुर, पुणे या इंदौर भेजने के बजाय ग्वालियर में ही रखना पसंद करते हैं। यहां शिक्षा की उच्च गुणवत्ता कम दामों पर उपलब्ध है। इसे देखते हुए देश के अलग अलग हिस्सों के छात्र ग्वालियर की ओर रूख करने लगे हैं।

      ग्वालियर में प्रबंधन और इंजिनियरिंग के छात्रों के लिये व्यवहारिक प्रशिक्षण की सुविधायें भी बहुतायत में हैं। भिण्ड के मालनपुर और मुरैना के बानमौर औद्यौगिक क्षेत्र में मैकेनिकल, इलेक्ट्रीकल, डेयरी, ऊर्जा, आटोमोबाइल, इलेक्ट्रोनिक्स के एक से बढ़कर एक संस्थान है।

      निकट भविष्य में ग्वालियर में आई टी. पार्क के अलावा एस ई.जेङ की स्थापना भी होने वाली है। ग्वालियर के विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा विकसित की जा रही टाउनशिप में भी देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों ने अपनी इकाइयां स्थापित करने का निर्णय किया है।

       अब दुनिया का शायद ही ऐसा कोई विषय होगा जिसके अध्ययन और अध्यापन की सुविधा ग्वालियर में उपलब्ध न हो। ग्वालियर में राष्ट्रीय स्तर के इंजीनियरिंग कालेजों के साथ ही प्रबंधन के क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के संस्थान उपलब्ध है। शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में तो ग्वालियर में एशिया का अनूठा संस्थान है। ललित कलाओं और संगीत के छात्रों के लिये अब कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है। छात्र यहां अध्ययन, अध्यापन के साथ ही तानसेन समारोह के माध्यम से देश के   प्रतिष्ठित संगीतज्ञों से सीधे रूबरू हो सकते हैं। कला के प्रदर्शन के लिये यहां तानसेन कला वीथिका भी है।

       सारांश यह है कि ग्वालियर में गरीब से गरीब और अमीर से अमीर छात्रों के लिये अध्ययन की श्रेष्ठतम सुविधायें उपलब्ध हैं। पब्लिक स्कूलों में रूचि रखने वालों के लिये सिंधिया स्कूल तो यहां है ही। रेलवे और उड्डयन के विषयों से जुड़े उच्च स्तरीय संस्थान ग्वालियर को 'एज्यूकेशन हब' के रूप में मान्यता दिलाने में कामयाब रहे हैं।

       ग्वालियर के आई आई टी एम. और ए बी आई. आई आई टी एम में तो प्रवेश अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षाओं के जरिये होता है। इंजिनियरिंग, चिकित्सा एवं प्रबंधन संस्थानों में राज्यस्तर की प्रवेश परीक्षा म प्र. व्यवसायिक परीक्षा मण्डल की ओर से संचालित की जाती है। म प्र. के तकनीकी प्रबंधन और चिकित्सा संस्थानों में प्रवेश एवं शिक्षा शुल्क अन्य शहरी और राज्यों के मुकाबले काफी कम हैं।